छत्तीसगढ़
धारदार हथियार से जानलेवा हमला करने वाले दो आरोपियों को 10-10 साल की सजा
Shantanu Roy
12 Sept 2026 11:11 PM IST

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छग
Durg. दुर्ग। जिले में जानलेवा हमला करने के मामले में न्यायालय ने दो आरोपियों को कठोर सजा सुनाई है। गंभीर अपराध में प्रभावी पुलिस विवेचना और मजबूत साक्ष्यों के आधार पर माननीय तृतीय अपर सत्र न्यायाधीश, दुर्ग ने दोनों आरोपियों को दोषी ठहराते हुए 10-10 वर्ष के सश्रम कारावास और अर्थदंड से दंडित किया है। दुर्ग पुलिस के अनुसार यह फैसला समयबद्ध जांच, घटनास्थल निरीक्षण, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान, चिकित्सकीय रिपोर्ट और अन्य दस्तावेजी साक्ष्यों के आधार पर आया है। पुलिस का कहना है कि गंभीर अपराधों में लगातार प्रभावी विवेचना कर दोषियों तक पहुंचने और न्यायालय में प्रकरण मजबूत तरीके से प्रस्तुत करने का प्रयास किया जा रहा है।
बाजार चौक के पास हुआ था हमला
पूरा मामला पुलगांव थाना क्षेत्र के ग्राम करंजा भिलाई बाजार चौक का है। घटना 30 जून 2025 की रात करीब 11 बजे की बताई गई है। पुलिस के अनुसार आहत आशीष ठाकुर का आरोपियों के साथ किसी बात को लेकर विवाद हुआ था। विवाद के दौरान आरोपियों ने उसके साथ गाली-गलौज की और धारदार हथियार से हमला कर दिया। आरोप है कि आरोपियों ने आशीष ठाकुर की पीठ और कमर के महत्वपूर्ण हिस्सों पर वार किए, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया। घटना के बाद आसपास के लोगों ने इसकी सूचना पुलिस को दी। सूचना मिलने पर पुलगांव पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए मामला दर्ज किया और जांच शुरू की।
पुलिस ने जुटाए महत्वपूर्ण साक्ष्य
मामले की जांच के दौरान पुलिस ने घटनास्थल का निरीक्षण किया। इसके साथ ही घटना से जुड़े गवाहों के बयान दर्ज किए गए और घायल की मेडिकल रिपोर्ट सहित अन्य दस्तावेजी साक्ष्य एकत्र किए गए। पुलिस ने विवेचना पूरी करने के बाद प्रकरण न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया। अभियोजन पक्ष की ओर से न्यायालय में मौखिक और दस्तावेजी साक्ष्य प्रस्तुत किए गए। उपलब्ध साक्ष्यों के परीक्षण के बाद न्यायालय ने दोनों आरोपियों को दोषी माना।
दो आरोपियों को सुनाई गई सजा
माननीय तृतीय अपर सत्र न्यायाधीश, दुर्ग द्वारा 5 सितंबर 2026 को पारित निर्णय में आरोपी:
अमित दास मानिकपुरी (19 वर्ष), निवासी करंजा भिलाई
मोहन धीमर उर्फ मोन्टू (24 वर्ष), निवासी करंजा भिलाई
को भारतीय न्याय संहिता की धारा 109 सहपठित धारा 3(5) के तहत दोषसिद्ध किया गया।
न्यायालय ने दोनों आरोपियों को 10-10 वर्ष के सश्रम कारावास और 1-1 हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया है। अर्थदंड जमा नहीं करने पर आरोपियों को अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। इसके अलावा भारतीय न्याय संहिता की धारा 296 के तहत दोनों आरोपियों को 1-1 माह के साधारण कारावास और 500-500 रुपये के अर्थदंड की सजा भी सुनाई गई है। न्यायालय के आदेश के अनुसार सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी।
अभियोजन ने की प्रभावी पैरवी
इस मामले की विवेचना निरीक्षक प्रकाशकांत द्वारा की गई। न्यायालय में अभियोजन पक्ष की ओर से अतिरिक्त लोक अभियोजक भावेश कटारे ने प्रभावी पैरवी की। पुलिस द्वारा उपलब्ध कराए गए साक्ष्यों और अभियोजन पक्ष की दलीलों के आधार पर न्यायालय ने दोनों आरोपियों को दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई।
गंभीर अपराधों में कार्रवाई जारी
दुर्ग पुलिस ने कहा है कि गंभीर अपराधों में दोषियों को सजा दिलाने के लिए पुलिस लगातार साक्ष्य आधारित विवेचना कर रही है। अपराध होने के बाद घटनास्थल से साक्ष्य जुटाने, गवाहों के बयान और वैज्ञानिक जांच के आधार पर मामलों को न्यायालय तक मजबूत तरीके से पहुंचाया जा रहा है। पुलिस ने आम नागरिकों से अपील की है कि विवाद की स्थिति में कानून अपने हाथ में न लें। किसी भी प्रकार की हिंसक या आपराधिक गतिविधि की जानकारी तत्काल पुलिस को दें, ताकि समय पर कार्रवाई की जा सके। पुलिस का कहना है कि कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई लगातार जारी रहेगी।
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